
हर शहर में कहानियाँ होती हैं... पर बनारस में अफसाने होते हैं जो गली में नहीं, लोगों की जुबान पर रहते हैं।
ये किताब उन मोहल्लों से आई है जहाँ पान की दुकान पर प्रेम-विरह के डिस्कशन होते हैं, जहाँ हर दूसरा शख्स खुद को काशी का कबीर समझता है...
और हर तीसरी अम्मा किसी न किसी की अधूरी कहानी की गवाह होती है।